मैट्रिक टॉपर है पर गरीब है! बिटिया के हौसले को गांववालों ने दी ताकत, मिलकर उठाएंगे पढ़ाई का खर्च

मैट्रिक परीक्षा की जिला टॉपर आर्थिक रूप से कमजोर है. उसके सिर पर न पिता का साया है, न दादा की छत्रछाया. वह अब तक सिर्फ अपनी मां और दादी के भरोसे रही है. यह कहानी है जहानाबाद की जिला टॉपर प्रियांशु कुमारी की. लेकिन इस कहानी में सुखद यह है कि जिला टॉपर होने के बाद अब वह पूरे गांव को प्रिय है और इस गांव ने अपनी इस लाडली बेटी की पढ़ाई की जिम्मेवारी अपने सिर उठा ली है.

जहानाबाद के मखदुमपुर प्रखंड में है सुमेरा गांव. यहीं अपनी बड़ी बहन, मां और दादी के साथ रहती है प्रियांशु. मैट्रिक में उसने 472 अंक हासिल किए. प्रियांशु की इस प्रतिभा और उसके परिवार की अभावग्रस्त जिंदगी देखकर यहां के सेवानिवृत्त फौजी संतोष कुमार ने पहल की. बच्ची की मदद के लिए इस गांव के लोग एक कमिटी का गठन कर रहे हैं. यह कमिटी इस बच्ची की जरूरतों का ध्यान रखेगी. प्रियांशु के सपनों की उड़ान को पंख देने के उद्देश्य से हरसंभव मदद का आश्वासन दिया जा रहा है.

प्रियांशु का मुरीद हुआ गांव

बता दें कि प्रियांशु ने अपने पिता का मुंह तक नहीं देखा है. जब वह मां के गर्भ में थी तभी उसके पिता कौशलेंद्र शर्मा का निधन हो गया था. कुछ समय बाद दादा भी गुजर गए. लेकिन उसकी मां शोभा देवी और दादी सुमित्रा देवी ने प्रियांशु की पढ़ाई जारी रखी. मां और दादी की छत्रछाया में प्रियांशु का प्रतिभा इस कदर निखरा की वह जिले की टॉपर होकर सभी को अपना मुरीद बना लिया. प्रियांशु आईएएस बनना चाहती है.

 

डेढ़ बीघा जमीन

प्रियांशु के परिवार के पास पैतृक मकान के साथ-साथ खेती योग्य डेढ़ बीघा जमीन है. घर में कोई पुरुष सदस्य नहीं रहने के कारण खेती बटाइदारों द्वारा की जाती है. जमीन के इस छोटे टुकड़े से ही चार लोगों के इस परिवार का गुजारा चलता है. ऐसे में प्रियांशु का आईएएस बनने का सपना तभी साकार हो सकता है जब उसे आर्थिक सहारा मिले.

 

गांववाले कहते हैं ‘प्रियांशु का सपना जरूर होगा पूरा’

सुमेरा के ग्रामीणों का कहना है कि उनकी गांव की बेटी आईएस जरूर बनेगी. हमलोग उसकी पढ़ाई-लिखाई में कोई कोर कसर नहीं छोड़ेंगे. प्रियांशु का मैट्रिक टॉपर होना सिर्फ उसके परिवार के लिए ही नहीं, पूरे गांव के लिए गर्व की बात है. जब वह आईएएस बनेगी, तब हमलोग अपने आप को सौभाग्यशाली और गौरवशाली महसूस करेंगे.

 

गांव ने दिया गहरा संदेश

सुमेरा गांव के लोग अपने इस निर्णय से समाज को एक नया संदेश दे रहे हैं. निजी स्वार्थों ने आज देश के लगभग तमाम गांव-शहरों का परिवेश प्रदूषित कर दिया है. ऐसे में एक बच्ची की पढ़ाई के लिए गांव का यह सामूहिक प्रयास देश और समाज को बहुत गहरा संदेश देता है.

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